शिष्य वाणी

गुरु युगती से ताकु गगन में, तब झलकै एक तारा रे। वह तारा गुरुदेव बतावैं, जोति महल का द्वारा रे॥

  • गुरु द्वारा बताई गई सूक्ष्म क्रिया ( ध्यान ) के द्वारा जब साधक आकाशमंडल (आज्ञा चक्र/तीसरे नेत्र) में दृष्टि टिकाता है। तब उसे भीतर एक तारा (ज्योति) दिखाई देता है।उस सूक्ष्म ज्योति को गुरुदेव ही सही मार्ग दिखा सकते हैं। वही तारा ज्योतिर्मय महल ( परमधाम ) का द्वार है।

परंपरा

त्याग-मय जीवन, मर्यादित व्यवहार।

प्रतिष्ठा

से प्राप्त दैवीय गुण अर्जित उपार्जित मनुष्य

अनुशासन

से अनुशासित कार्यशैली से संगठित संघ।
सूरत-शब्द-योग

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एक नए दिशा में अग्रसर यह गुरुकुल पूज्य श्री गुरुमहाराज को समरपित

महर्षि मेँहीँ शाही गुरुकुलम्

अंधकार से मुक्ति हो, गुरु शरण ही ठौर,
ज्ञान दीप जब जल उठे, मिटे भ्रम का जोर।

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Spiritual Maturity Is For Everyone

हम ईश्वर से प्रेम करते हैं, हम ईश्वर में विश्वास रखते हैं।

सतगुरु की कृपा के बिना मन की अशांति समाप्त नहीं होती। संसार की माया में फंसा जीव तब तक दुखी रहता है जब तक उसे सच्चे गुरु का सहारा नहीं मिलता। गुरु ही नाम और ध्यान के माध्यम से आत्मा को शांति और मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं।

प्रभु की राह में गुरु की सेवा में

गुरूकुलम में होने वाले कार्यक्रम

आने वाले दिनों में गुरुकुल के माद्यम से संपन्न होने वाले कार्यक्रम की सूची और विवरणी यहाँ प्राप्त की जा सकती है 

 

जन कल्याण की रह पर .....

गुरुकुल के आचार्य केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन के पथप्रदर्शक होते हैं। वे अज्ञानता से भरे शिष्य के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाकर उसे सत्य और धर्म के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। उनकी वाणी में मधुरता, अनुभव और सत्य का अद्भुत संगम होता है।

पूज्य आचार्य अपने शिष्यों को केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन और विनम्रता का अमूल्य उपहार भी प्रदान करते हैं। वे हर परिस्थिति में धैर्य, साहस और सदाचार का मार्ग दिखाते हैं।

गुरुकुल की पवित्र परंपरा में आचार्य का स्थान सर्वोच्च माना गया है, क्योंकि वे शिष्य के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं और उसे एक योग्य एवं आदर्श मानव बनाते हैं।